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पितरो को खुश करने के लिए किये जाते 16 दिन श्राद्ध,पिंडदान करने से हो जाते है पितृऋण से मुक्त !!

पौराणिक मान्यता के अनुसार पितरों को स्मरण करने और उनके निमित्त तर्पण,पिंडदान और पूजन करने से व्यक्ति पितृऋण से मुक्त हो जाता है। 


पितर प्रसन्न होकर व्यक्ति को वह सब देते हैं जिसकी उसे कामना होती है उसे संतान, धन-धान्य से संपन्नता आदि प्रदान करते हैं। 


माना जाता है कि देह से मुक्त होने के बाद जीवात्मा को पिंड दान कर आगे की गति का कार्य किया जाता है। 


इस तरह से श्राद्धकर्म कर उनकी परमगति की कामना की जाती है और पितृऋण से मुक्त हुआ जाता है बुधवार से देश भर में श्राद्ध पक्ष का प्रारंभ हो गया।


पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध पक्ष में उनकी आराधना की जाती है इस माध्यम से हम पितर ऋण को उतारते हैं। 


 सौलह दिन के श्राद्ध पक्ष में विभिन्न तिथियों के साथ सर्वपितृ अमावस्या के दिन और प्रतिपदा व चतुर्दशी के दिन सभी पितरों को तर्पण दिया जाता है इससे पितर प्रसन्न होते हैं।

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