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मकर सक्रांति के दिन तिलों का दान करने से धूल जाते है सारे पाप,पुण्य करने से मिलेगा स्वर्गलोक !!

सब जानते है की मकर संक्रांति से पर तिलों का विशेष महत्व है लेकिन इससे  दो दिन पहले भी तिलों का कई तरह से उपयोग किया जाता है। 


प्रति वर्ष माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाता है हिन्दू धर्म के अनुसार तिल बहुत पवित्र माने जाते हैं और पूजा में इनका विशेष महत्व होता है। 


छ: प्रकार से तिलों के उपयोग के कारण ही इस एकादशी का नाम षट्तिला एकादशी पड़ा। 


तिल से स्नान करना,तिल का उबटन लगाना,तिल से हवन करना,तिल से तर्पण करना ,तिल का भोजन करना, तिलों का दान करना। 


षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजाका विधान है  पद्म पुराण के अनुसार चन्दन, अरगजा, कपूर, नैवेद्य आदि से भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए उसके बाद श्रीकृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए कुम्हड़ा, नारियल अथवा बिजौर के फल से विधि विधान से पूज कर अर्घ्य देना चाहिए।


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार षट्तिला एकादशी के दिन जो भी व्यक्ति व्रत करता है उसे तिलों से भरा घडा़ भी ब्राह्मण को दान करना चाहिए ऐसी मान्यता है की जितने तिलों का दान वह करेगा उतने ही ह्जार वर्ष तक वह स्वर्गलोक में रहेगा। 

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